Urdu shayari

 *दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ। मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ।। 


*वो बारिश में कोई सहारा ढूँढता है फ़राज़ ।ऐ बादल आज इतना बरसकी मेरी बाँहों को वो सहारा बना ले ।।


*और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा।राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा ।।


*इस रास्ते के नाम लिखो एक शाम औरया इस में रौशनी का करो इंतिज़ाम और


*हम भी क्या ज़िंदगी गुज़ार गएदिल की बाज़ी लगा के हार गए


*बक रहा हूँ जुनूँ में क्या क्या कुछकुछ न समझे ख़ुदा करे कोई


*आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता हैभूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है


*दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैंकितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
               

Published by patil blog

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