*दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ। मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ।।
*वो बारिश में कोई सहारा ढूँढता है फ़राज़ ।ऐ बादल आज इतना बरसकी मेरी बाँहों को वो सहारा बना ले ।।
*और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा।राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा ।।
*इस रास्ते के नाम लिखो एक शाम औरया इस में रौशनी का करो इंतिज़ाम और
*हम भी क्या ज़िंदगी गुज़ार गएदिल की बाज़ी लगा के हार गए
*बक रहा हूँ जुनूँ में क्या क्या कुछकुछ न समझे ख़ुदा करे कोई
*आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता हैभूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
*दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैंकितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं